Tuesday, 20 May 2014

मौजूँ रहै … दिग्गी के रिलेशन और एन डी की टेंशन



मौजूँ  रहै … दिग्गी के रिलेशन और एन डी टेंशन  
(मज़ाहिया.... )


ख़ाक़ा उनके अब्बु ने ऐसा खींचा;
कि हम भी गच्चा खा गए ,
बेमेल थी हसरतें तमाम पर ;
करके कोशिशें दोनों निभा गए | 


कुदरत को ही होगा मंजूर, 
इसमें कुछ भला हमारा ओर भी  ;
होता नहीं था सबर जिन दिनों,
बंदे ने अंगूर 
खट्टे ख़ा लिए | 



ऐ 
मेरे मौला किसी को किसी से 
इतनी मोहोब्बत भी ना हो जाए ; 
सींचा हो जिसने गीचा जवानी में 
बुढापे में उसीके कहर न ढाए |


हो रहा 
ये जी खट्टा खट्टा , अब कहने से क्या है फायदा ;

वोह आए और नसीब में रोशन
नया चाँद लिखवा ले चले | 

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              ~ प्रदीप यादव
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Sunday, 11 May 2014


Gulzar, Indian cinema's most versatile wordsman

http://www.ndtv.com/video/player/bollywood-roots/gulzar-indian-cinema-s-most-versatile-wordsman/275696


ग़ज़ल को नाम तोह मिला करता था,
बस ईनाम एक तू ही हुआ " गुलज़ार "।


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प्रदीप यादव ~
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Ghazal ko naam Toh mila karta thaa,
Bas Iinam Ek tu hi hua "GULZAAR".
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 By ~ Pradeep Yadav ~  


इंसानियत के भरम


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इंसानियत के
भरम
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Khaamosh ho Jaata hoon ;
Salaami teri har Zabt ko deta hoon,

Insaaniyat is tarha ,
 main tera Bharam rakhtaa hoon .

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By ~  Pradeep yadav  ~

खामोश हो जाता हूँ ,
 सलामी तेरी हर ज़ब्त को देता हूँ ,

इंसानियत इस तरहा,

 मैं तेरा भरम रखता हूँ ।
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 प्रदीप यादव ~