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आह लिखता हूँ तोह वाह कहती हैं ,
जिंदगी भी लफ्जों को यूँ रंगती है |
~ प्रदीप यादव ~
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जब भी मिला हालात पूछती है दुनिया ,
किस्सा बर्बादी का यूँ छुपाती है दुनिया |
by ~ प्रदीप यादव ~
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फ़ौरन से पेश्तर लपकती है दुनिया मिले मौकों को ,
मौक़ापरस्त मैं भी नहीं दुआ में बस असर न रहा |
~ प्रदीप यादव ~
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होनहार बेअक्ल दिलों ने क्या क्या न किया ;
इश्क वाली तरकीबें समझे मौत को भूल के |
~ प्रदीप यादव ~
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Pani hi toh sirf Pi rahaa thaa woh maykhaane mein baith kar,
Nashaa nahi paimaane mei ,aankhon mei surar utarne ke
sabab KYun dhundhataa tha .
~ Pradeep Yadav ~
पानी ही तोह सिर्फ पी रहा था वोह मयखाने में बैठ कर ;
नशा नहीं पैमाने में आँखों में सुरूर उतारने के सबब क्यूँ ढूंढता था |
~ प्रदीप यादव ~
दर्द को चूमना भी अमां कोई बच्चों का खेल है भला ,
भट्टी से खौलता लोहा बनना होता है खुदी को गला |
by ~ प्रदीप यादव ~