Showing posts with label nu. Show all posts
Showing posts with label nu. Show all posts

Sunday, 25 November 2012

न्यौछावर ( अर्पण )

 न्यौछावर ( अर्पण ) 

अखबारों की खबरों का आता रहेगा रेला,
चौंसठवें गणतंत्र का सिहांसन ऐसे डोला,
कोई बागड़ ही खाए जा रहा, ताल्लुकात
भेड़ीयों से बताकर 'सिंह' को है, डरा रहा,
जात पांत ने फिर क्यों भर दिया है हाला,
मूर्छा हालत में तेरी थी ये भग्न रंगशाला,
कोई हिन्दी तमिल  का मसला  बता रहा,
ईशनिंदा कर डरने वाले तोड़ रहे शिवाला,
मुहाफ़िज़ ही खाते रहा छीन कर निवाला,
प्रवचन देने वाले अरबपति का भरा थैला,
बातों का हश्र देखा है नींद की लंबी बेला,
अमृत छके को इस देश में कैसा झमेला,
हर बैसाखी अन्न दिया सीमा डाले पहरा,
विश्वास कई डोल चुके आँगन बता मैला,
खेला अनुसंधान कर हथियारों का खेला,
राजा बन रहे, बुराइयों के कोढ़ को फैला,
कद्दावर क्यों भाग रहे बनकर यहाँ लैला,
आवाज़ के साथ चलो बढ़ाओ हाथ मिला,
वक़्त को दिखाओ ज़रा जोशे जूनून की सरगोशियाँ
बढ़े चलो की लुटेरे नकाब ओढ़ कर रहे गुस्ताखियाँ,
इश्क में मादरे- वतन तेरे मिसाल कायम कर चला,
जोश तेरी शहादत का देख आज संदेश परवान चढ़ा |

~.प्रदीप यादव ~