Friday, 17 August 2012



 65 वीं सालगिरह मेरा भारत महान,
 शुभ स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2012 ....
By  प्रदीप यादव 

हमें देश के प्रत्येक सैनिक, किसान,
उद्यमी,कर्मचारी, वैज्ञानिक, बुधिग्य
मनीषियों,नेता,कलाकार,खिलाड़ी,
साहित्यकार,अनाम जाँबाजों तथा
सम्पुर्ण पृथ्वी और अब 
अन्तरिक्ष
में भी स्थित भारत और भारतीय 

मूल  के समस्त  स्त्री - पुरुषों  एवं
बच्चों और
उनकी उपलब्धियों पर
अपार गर्व है ।   

एक गर्वित भारतीय  
भारत  : सोना --  चांदी 02 कांस्य 04
दोस्तों यदि हमारे प्रतिभावान खिलाड़ी ब्राज़ील में अपने पदकों का रंग सुनहरा कर पाए तो हम पदक तालिका में 15 वें स्थान पर  होंगे ।

रात का मीठा

  रात का मीठा 

गुजारा दिन रोज की झूठी सच्ची बातों में ,

बातें जिनमें चैन ना था सुकून भरा बेन ना था ।
उडी उडी सी रंगतों और हरकतों से था बेज़ार,
 मुश्किलों का मेरी तो कोई ठिकाना ना था ।

सम्हल कर चलूँ तो डरपोक ,
हंसी ठिठोली ने बनाया लोफर,
कुबुलनामे मेरे नाटकबाज़ी बने ,
रुसवाइयों को तमाम तेवर कहे,
चलता हूँ, शाम भी गहराई है,
सूरज का छूट रहा है साथ,
रात ने दे डाली थी दस्तक ।

भुलाने कडवाहट ज़माने भर
की देर  नहीं करता अज़ीज़ ।

मेरे घर खाने पर मिलने वाला
"रात का मीठा" लगता लज़ीज़।

..... प्रदीप यादव 03 सितम्बर 2012




प्रकृति 


दर्द ऐ बादल


लोगों गर बरस गया मैं जो झूम कर,


मेरे इस लाड़  को बस यंही  भूल कर,


याद से रख लेना हर एक बूँद सहेज कर,


बिखरी धुंध को जैसे तैसे लाया समेट कर,


बारीश बन छलक भी रहा हूँ अनमना,


गरजना कड़कड़ा कर चमकना


भरम है हँसता हूँ खिलखिला कर,


इस रोने को ठहाको का समझो ना जरिया,


उजाड़ कर जंगल तुमने कब्जाए जो दरिया,


मोरों की बस्ती मीठी अमरुद की बगिया,


लौटा दो मेरे दोस्त दरख्त छोटी से चिड़िया ।

 ...... प्रदीप  यादव   
22/07/2012