घोटाले का अवज्ञा आन्दोलन
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ये आचार संहिता हड़पने नहीं देती ईमान !
चुनाव आए देश में भूखे वोटरों को लुभाने |
व्यर्थ है अब रथी बन कर चक्रव्यूह भेदन ,
किया करो आरंभ नई कुप्रथाओं का चलन |
कंस वध करो या फिर कर दो रावण-दहन ,
मूक बन सुनो मृतप्राय मर्यादा के क्रन्दन|
शासकों ने करवाए शोषितों के अभिनंदन ,
अवसरवादी क्योँ भूलें चुनावचक्र में उद्यम ?
बनाओ परिवारवाद के अखंड समीकरण ,
पाचक बूटी पीकर पचालो सारे खाद्यान्न |
ह्रदय-परिवर्तन सत्ताधीश के नए अनुसंधान |राम मिले फिर प्याज से भूखे के हों भगवान !
सांड लड़ाने जैसा यह रोमांचकारी अनुभव ,
गोदामों में रहे अनाज रूपया हो रहा गरीब ,
दाने दाने को तरसते चारे से कुबेर किसान ,
भंग करो विकास भाईचारा मिल करें घोटाला |
~ प्रदीप यादव ~
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