यूँ बार बार ना देख इन जख्मों की उकेर ;
घावों की पीर के नाम जिंदगी की हमने । ~ प्रदीप यादव ~
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देखो दिल की गुलामी करके ,
महफ़िलों में दिल वाले मिले |
होश रखिये तोह वोह दिलनवा मिले ;
हार कर जीतने का सिलसिला मिले | ~ प्रदीप यादव ~
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दिल टूटने से न डर, लगाते हैं दिल ,
वोह इसका सोना परखने के लिए | ~ प्रदीप यादव ~
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कातिल दिल का पूछ ही बैठा ,
बता खिलौना ए दिल, हौसले तुझमें
भरता कौन ? ~ प्रदीप यादव ~
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या रब ....
तपाना मुझे भी उस दौर तक ,
संवर जाऊँ ईंसाँ के तौर तक | ~ प्रदीप यादव ~
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पूछा जो उसने दिल का रास्ता ,
सुराख दिलों के हमने दिखलाए | ~ प्रदीप यादव ~
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