चाय हो जाए
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चाय हो जाय-------------------
खींच लूँगा दो
पल ये ज़िंदगी
चाय चाहतें और
दिन सर्दी के ,
चंद बिस्किट्स
के साथ गटकी
सुनहरी दुधिया
मीठी सी गर्मी |
रात ये नींद
के नशे
गूज़ार लोगे
ख़ुमारी में,
फर्ज़ है ये
ताज़ा चस्का ,
मना लेते है,
महकती कसक़ पर ,
हर एक रूठते को,
ये चुस्कि भर
चाय के स्वाद |
----------------------~ प्रदीप यादव ~
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