Saturday, 28 November 2015

चाय हो जाए

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चाय हो जाय------------------- खींच लूँगा दो पल ये ज़िंदगी चाय चाहतें और दिन सर्दी के , चंद बिस्किट्स के साथ गटकी सुनहरी दुधिया मीठी सी गर्मी | रात ये नींद के नशे गूज़ार लोगे ख़ुमारी में, फर्ज़ है ये ताज़ा चस्का , मना लेते है, महकती कसक़ पर , हर एक रूठते को, ये चुस्कि भर चाय के स्वाद | ----------------------~ प्रदीप यादव ~

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