आगाज़ ....
By ~ प्रदीप यादव ~
सूर्य को दिखाए ,
हुनर ने चिराग
अधेरे खूब हुए |
महंगे हो चले है ,
मनुहार , चलो !
अब यलगार हो |
खराब है शराब ,
नशे के घोल ये ,
मुंह खोल गए |
कडवा लगा सच ,
चख कर फिर ,
झूठा कर गए |
विषैले थे ईमान ,
हर अक्स को ,
शीशे की सलाह |
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By...~ प्रदीप यादव ~
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