Wednesday, 19 March 2014

होली गीत

****
होली गीत .. (~ प्रदीप यादव ~ )


फाग
में गुल रँग सी खिल जाऊँ ,

मैं भी गुलबीया हो जाऊं रसिया ,


चाशनी भरे बेन जो बोले तू ,

मै चमचम सी हुई जाऊं रे मनबसिया ,

जो तू झूमे संग हलके हौले से ,

मदीरा बन इतराऊँ रे मोरे सरबिया ,

ताड़े हे मुआ पड़ोसी छिछोरा मोहे ,

गारी रे दईके ओहके बरजाऊँ राजा ,

हाय राम उहै जुल्मी रहे भरतार री ,

कहाँ लुकाऊँ( छिपाऊँ ) भीगो बदन ओर अंगिया ,

लागी छेड़न ई दारीं सखीयाँ, सहेलियां ... |

सरकत चुनरी मोरी छुड़ाऊं तोसे ,

ढलकत हरकत लजाऊँ रे बैरी पिया ,

रँग डारो जो मोहे धोखिन जुलमिया ,

हरषत लाजत होरी मनाऊँ रे बलमवा |

रचत रास लिन्हों संग भींच हुरियार पिया ,

महकत जाऊँ , धीर न पाऊँ , संवर संवर जाऊँ ... मैं;

री संवर संवर जाऊँ ..... ,

बलमवा मोरे गुलबीया मैं तोहरी हुई जाऊँ | 



 ~
प्रदीप यादव ~

No comments:

Post a Comment