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होली गीत .. (~ प्रदीप यादव ~ )
फाग में गुल रँग सी खिल जाऊँ ,
मैं भी गुलबीया हो जाऊं रसिया ,
चाशनी भरे बेन जो बोले तू ,
मै चमचम सी हुई जाऊं रे मनबसिया ,
जो तू झूमे संग हलके हौले से ,
मदीरा बन इतराऊँ रे मोरे सरबिया ,
ताड़े हे मुआ पड़ोसी छिछोरा मोहे ,
गारी रे दईके ओहके बरजाऊँ राजा ,
हाय राम उहै जुल्मी रहे भरतार री ,
कहाँ लुकाऊँ( छिपाऊँ ) भीगो बदन ओर अंगिया ,
लागी छेड़न ई दारीं सखीयाँ, सहेलियां ... |
सरकत चुनरी मोरी छुड़ाऊं तोसे ,
ढलकत हरकत लजाऊँ रे बैरी पिया ,
रँग डारो जो मोहे धोखिन जुलमिया ,
हरषत लाजत होरी मनाऊँ रे बलमवा |
रचत रास लिन्हों संग भींच हुरियार पिया ,
महकत जाऊँ , धीर न पाऊँ , संवर संवर जाऊँ ... मैं;
री संवर संवर जाऊँ ..... ,
बलमवा मोरे गुलबीया मैं तोहरी हुई जाऊँ |
~ प्रदीप यादव ~
होली गीत .. (~ प्रदीप यादव ~ )
फाग में गुल रँग सी खिल जाऊँ ,
मैं भी गुलबीया हो जाऊं रसिया ,
चाशनी भरे बेन जो बोले तू ,
मै चमचम सी हुई जाऊं रे मनबसिया ,
जो तू झूमे संग हलके हौले से ,
मदीरा बन इतराऊँ रे मोरे सरबिया ,
ताड़े हे मुआ पड़ोसी छिछोरा मोहे ,
गारी रे दईके ओहके बरजाऊँ राजा ,
हाय राम उहै जुल्मी रहे भरतार री ,
कहाँ लुकाऊँ( छिपाऊँ ) भीगो बदन ओर अंगिया ,
लागी छेड़न ई दारीं सखीयाँ, सहेलियां ... |
सरकत चुनरी मोरी छुड़ाऊं तोसे ,
ढलकत हरकत लजाऊँ रे बैरी पिया ,
रँग डारो जो मोहे धोखिन जुलमिया ,
हरषत लाजत होरी मनाऊँ रे बलमवा |
रचत रास लिन्हों संग भींच हुरियार पिया ,
महकत जाऊँ , धीर न पाऊँ , संवर संवर जाऊँ ... मैं;
री संवर संवर जाऊँ ..... ,
बलमवा मोरे गुलबीया मैं तोहरी हुई जाऊँ |
~ प्रदीप यादव ~
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