मस्ती के सबक ....
मैं हूँ नाज़ुक कश्ती कागज़ की,
है भरोसा तोह उस पार जाने का,
गर डूबी तोह मज़ा आजमाने का,
बिन पतवार नसीब मनाने का ,
उलझी ज़िदगी को सुलझाने का,
नई मस्ती के सबक सिखाने का,
आफत से दो चार करने का,
मैंने हवाओं में सीखा टिकना,
किस्मत के थपेड़े से जूझना,
मैं हूँ नाज़ुक कश्ती ..... by ~ प्रदीप यादव ~
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टूट कर बिखरे हो, तोह तुम ज़हान बन जाना
चाहत भरे दिल में किरचे की तरह बस जाना। ~ प्रदीप यादव ~
Tut kar Bikhare ho toh tum zahaan ban janaa ,
Chahat bhare dil mei Kirche ki taraha bas janaa . ~ PRADEEP YADAV ~
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