जीए तू सदा
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हे पुरुष वामांगी नमन ,
सखी सजनी सरस प्रिया ,
जीवन साकार सफल किया |
पिया पल पल अनुरागी
फूलते बचपन का वरदान ,
संकट मोचक बनी बडभागी |
सुमुधुर ध्वनित सरगम बोली,
लग्नोपरांत पति संग डोली ;
अधूरी पूर्णता का अभिमान;
नखरेली नार भाँग की गोली;
मधुर मंद मुस्काती पत्नी ,
जीवन धूप तोह गुनगुनी तपती,
वामांगी ये जो अंग लगती |
प्रसन्न भगवन घर आँगन,
झूमे बगिया कूके उपवन ,
साथ संगिनी गमके जीवन ,
नये अंदाज़ भरे दर्पण,
बूझती शरारत आँख में ,
अगन भरी सिंगार में ,
जुडा कंगन टीका चंदन,
काल से निकाले कल्याण,
जीवन व्रत बने मधुबन |
~ प्रदीप यादव ~