Tuesday, 26 November 2013

शोले की तड़प


शोले की तड़प 

अंदाज़ों को परखा है हमने :
हुजुर !थोड़ा कम सही ; पर...
ये ज़माना देखा है हमने ...|

ऐ आग ! 
बढ़ने की हद क्या होती है ....

ज़रा किसी दिन चिंगारी से सुन !!!

~ प्रदीप यादव ~

Monday, 25 November 2013

जीए तू सदा


 जीए 
तू सदा 


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हे पुरुष वामांगी नमन ,


सखी सजनी सरस प्रिया ,


जीवन साकार सफल किया |


पिया पल पल अनुरागी


फूलते बचपन का वरदान ,


संकट मोचक बनी बडभागी | 




सुमुधुर ध्वनित सरगम बोली,

लग्नोपरांत पति संग डोली ;

अधूरी पूर्णता का अभिमान;

नखरेली नार भाँग की गोली;

मधुर मंद मुस्काती पत्नी ,

जीवन धूप तोह गुनगुनी तपती,

वामांगी ये 
जो अंग लगती |



प्रसन्न भगवन घर आँगन,

झूमे बगिया कूके उपवन ,

साथ संगिनी गमके जीवन ,

नये अंदाज़ भरे दर्पण,

बूझती शरारत आँख में ,

अगन भरी सिंगार में ,

जुडा कंगन टीका चंदन,

काल से निकाले कल्याण,

जीवन व्रत बने मधुबन |


   
      ~
प्रदीप यादव ~

Friday, 15 November 2013

सितम का मुकद्दर ....


सितम का मुकद्दर ....

बात इतनी बढ़ी कि ज़िकर छिड़ते ही ,
हरजाई हिचकियां उसे सताने लगती !

जब भी बात ये बनती दिखाई 
ही देती ,
तकदीरें तुनक-मिजाजी दिखाने लगी |  ~ प्रदीप यादव ~






शिकायत, दिल चुराने लिखो दरोगा जी ... :) 



ख़याल किसी डर का भी था डरावना भी ,

दिलों में इकरार था नज़रों से इंकार भी ... | 

~ प्रदीप यादव

Friday, 8 November 2013

ज़िंदगी ने जिसे अपनाया ...



ज़िंदगी ने जिसे अपनाया ...

कैसे करता मैं इंतज़ार भोर का,
मेरा चाँद तोह अभी डूबा नहीं |
बाद हौसला वो मैकदे तो आया ,
उल्टा लौटा जो नजरों से तर था |  

~ प्रदीप यादव ~


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आईना दिखा के वोह बोला ...

तुम बोलते हो तोह मान लेते हैं |
वर्ना, सच के टिकने का खतरा भी नहीं है ;
इस झूठी दुनिया में ...|


प्रदीप यादव ~