Friday, 15 November 2013


शिकायत, दिल चुराने लिखो दरोगा जी ... :) 



ख़याल किसी डर का भी था डरावना भी ,

दिलों में इकरार था नज़रों से इंकार भी ... | 

~ प्रदीप यादव

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