ज़िंदगी ने जिसे अपनाया ...
कैसे करता मैं इंतज़ार भोर का,
मेरा चाँद तोह अभी डूबा नहीं |
बाद हौसला वो मैकदे तो आया ,
उल्टा लौटा जो नजरों से तर था |
~ प्रदीप यादव ~
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आईना दिखा के वोह बोला ...
तुम बोलते हो तोह मान लेते हैं |
वर्ना, सच के टिकने का खतरा भी नहीं है ;
इस झूठी दुनिया में ...|
~ प्रदीप यादव ~
Nice efforts
ReplyDeleteNeed to be improvement.
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thanks Madan mohan ji for Urs precious comments ....
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