Friday, 8 November 2013

ज़िंदगी ने जिसे अपनाया ...



ज़िंदगी ने जिसे अपनाया ...

कैसे करता मैं इंतज़ार भोर का,
मेरा चाँद तोह अभी डूबा नहीं |
बाद हौसला वो मैकदे तो आया ,
उल्टा लौटा जो नजरों से तर था |  

~ प्रदीप यादव ~


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आईना दिखा के वोह बोला ...

तुम बोलते हो तोह मान लेते हैं |
वर्ना, सच के टिकने का खतरा भी नहीं है ;
इस झूठी दुनिया में ...|


प्रदीप यादव ~



2 comments:

  1. Nice efforts
    Need to be improvement.
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    1. thanks Madan mohan ji for Urs precious comments ....

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