Friday, 15 November 2013

सितम का मुकद्दर ....


सितम का मुकद्दर ....

बात इतनी बढ़ी कि ज़िकर छिड़ते ही ,
हरजाई हिचकियां उसे सताने लगती !

जब भी बात ये बनती दिखाई 
ही देती ,
तकदीरें तुनक-मिजाजी दिखाने लगी |  ~ प्रदीप यादव ~





2 comments:

  1. बहुत खूब !खूबसूरत रचना,। सुन्दर एहसास .
    शुभकामनाएं.

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    1. आ. मदन मोहन सक्सेना जी; आभार महोदय ...

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