Monday, 25 November 2013

जीए तू सदा


 जीए 
तू सदा 


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हे पुरुष वामांगी नमन ,


सखी सजनी सरस प्रिया ,


जीवन साकार सफल किया |


पिया पल पल अनुरागी


फूलते बचपन का वरदान ,


संकट मोचक बनी बडभागी | 




सुमुधुर ध्वनित सरगम बोली,

लग्नोपरांत पति संग डोली ;

अधूरी पूर्णता का अभिमान;

नखरेली नार भाँग की गोली;

मधुर मंद मुस्काती पत्नी ,

जीवन धूप तोह गुनगुनी तपती,

वामांगी ये 
जो अंग लगती |



प्रसन्न भगवन घर आँगन,

झूमे बगिया कूके उपवन ,

साथ संगिनी गमके जीवन ,

नये अंदाज़ भरे दर्पण,

बूझती शरारत आँख में ,

अगन भरी सिंगार में ,

जुडा कंगन टीका चंदन,

काल से निकाले कल्याण,

जीवन व्रत बने मधुबन |


   
      ~
प्रदीप यादव ~

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