भावनाएं
शफ़कत(प्रेम) में उनकी सलामती के सज़दे दुआ तमाम किए,
~ प्रदीप यादव ~
कायदे का फायदा
चलो कायदे मैं रहने के फायदे भी तो गिनों,
शफ़कत(प्रेम) में उनकी सलामती के सज़दे दुआ तमाम किए,
अदीब( विद्वान्) बेमिसाल वो ठहरे, जीभर दोस्तों के एहतराम किए.
~ प्रदीप यादव ~
कायदे का फायदा
चलो कायदे मैं रहने के फायदे भी तो गिनों,
हमें फिक्र थी कहां डायबीटीज़ की उन दिनों,
डूबी सी चाशनी मैं,मीठी सी एक कहानी थी
कहते थे जानने वाले,सजा है नाफरमानी की,
~ प्रदीप यादव ~
दोस्त की दुआ
दुश्मन ए जाना मेरे, तू भी क्या गज़ब ये करता है।
कह अलविदा मेरे लिए रोज़े सेहतयाबी के रखता है।
~ प्रदीप यादव ~ 20\07\2012
डूबी सी चाशनी मैं,मीठी सी एक कहानी थी
कहते थे जानने वाले,सजा है नाफरमानी की,
~ प्रदीप यादव ~
दोस्त की दुआ
दुश्मन ए जाना मेरे, तू भी क्या गज़ब ये करता है।
कह अलविदा मेरे लिए रोज़े सेहतयाबी के रखता है।
~ प्रदीप यादव ~ 20\07\2012
ढल रही थी शाम फिर समन्दर किनारे
ReplyDeleteतिलस्मी पूल से जुडते गए यादों के सहारे ... (प्रदीप )
Gujar ke umr ham bhi ' kitab ' ek ban gaye ,
ReplyDeletechand safe padh ke ve dusri or badh gaye | By Prady
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