मुर्दे की अभिलाषा
मरना था तो मैं मक़बूल हो चला ,
किसी रोज़ मेरी कब्र पर रोकर कोई हलाकान जी आराम पा जाएगा,
मज़बूत इरादे वाले भी देखकर मेरी हालत चाहत के शुक्र तलाशैंगे,
खामख्वाह जीने वालों पर तो दुनिया वाले भी लानतें मलानतें भेजेंगे,
गिन कर बदले लूँगा जीने वालों से जिस दिन वोह मेरे पड़ोसी बनेंगे,
तब पुछुंगा इन कामकाजी बंदो से,
कि बड़ी फुर्सत मैं मरे हो यार,
वरना मिलते ही कहते थे,
समय की कमी ऊपर से काम का भार,
GOOD NIGHT JI ...........RIP
No comments:
Post a Comment