Tuesday, 28 May 2013



चाहत में मेरी संदेश भेजोगे नोटों  पे,
तो है इश्क गाँधी से कह दो ज़माने से ।
 ~ प्रदीप यादव

Monday, 27 May 2013




इतना हारा हूँ दोस्तों, कि मजबूरी में जीतना सीख गया। 

तकदीर वालों की सोहबतों में नसीब बनाना सीख लिया॥ ~ प्रदीप यादव ~

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यूँ ही कह गया था गम का फसाना,
थम के रुक गया ये बेदिल ज़माना।

रूह का सवाल था साफ़दिल होना,
वरना जिस्म तो था पुराना अपना। 
~ प्रदीप यादव ~

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चल झूठा !!!
वफादारी की वकालत ज़रूर कोई राज़ है ,
मुफ्त रुस्वाईयाँ सहना भी शऊर होता है ।
 
~ प्रदीप यादव ~

Friday, 24 May 2013

बातें बतियाने वाली



बातें बतियाने वाली 
राह की हरियाली पैगाम हैं ,
कुदरत रखोगे हरी,तभी
तोह दिल की बनावट भी,
दिखाई देती रहेगी,
करते रहे सिर्फ जो रश्क,
भूलोगे जो कुदरत के सहारे ,
मिट रहेंगे,
जीने के एहसास सारे। प्रदीप यादव ~


पुर्जा ....
पूछना मेरी रूह के हवाले से,
सबब 
मेरी चाहतों के,
वोह खोजते हैं पुर्जा दर पुर्जा,
हालात मेरे इशारों के,
कोई समझाए जाकर उसे,
इस रूह में 'नाम' उसका हैं,
सपना उसी का है, अंदाज़ भी,
अंजाम उसी का है,
सच कहूं तोह मेरे इरादों
पर हर सोच उसी का हैं ....। 
~ प्रदीप यादव ~
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बुलंदिया मेरे मुकाम की,
पा गया जो एक दिन,
मेरे अपनों ने टांग खेंच,
मुझे नीचे गिरा दिया,
मैंने भी कह दिया,
ऎ लोगों कुछ देर ही सही,
मुहॊब्ब्त में नाम अपना,
हमने भी तोह लिख दिया ...। 
प्रदीप यादव ~

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पता पूछते हैं उनका,
जो नजरे मंसूब भी नहीं ....
महबूब कह दिया उसे,
दिल में जिसके ठौर नहीं ... ~ प्रदीप यादव ~

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बदनीयती के इरादे ताड़ ,
मेरे इमां की बोली वो लगा गए .... ।
  ~ प्रदीप यादव ~

पानी हूँ बहता सा रूख मेरे बाँध दो,
बह निकला तो हाथ नहीं आऊँगा .
....~ प्रदीप यादव ~

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इज़ाज़त के मायने हों हरदम नही ,
इल्तिजा जो समझे दिल करीब होते हैं
प्रदीप यादव ~

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जुदाई में इंतज़ार हो, तो दर्द ए सितमगर होता हैं ,
महबूब ना हो पाबन्द,तो ही अस्ल दिलबर होता हैं । ~ प्रदीप यादव


Wednesday, 8 May 2013

पत्थर से टकराने वाले



Zara Yun Bhi Soch 
E "Pathron se takraane wale" ...


Hauslaa mandi hai teri E patharon se takkar lene wale,
naqsh hue Jo surat e nishan, Qasmein leinge zamane wale .
~ Pradeep Yadav ~ 


  ज़रा यूँ भी सोच ए "पत्थरों से टकराने वाले" ....


हौसला मंदी है तेरी ए पत्थरों से टक्कर लेने वाले,
नक्श हुए जो सूरत
ए निशां,कस्में लेंगे ज़माने वाले।।  ~ प्रदीप यादव ~

मेरा मानना है मित्रों हमखयाल मिलता नहीं है
नसीब मिलाते हैं ......~ प्रदीप यादव ~ 

Tuesday, 7 May 2013

कोफ़्त



कोफ़्त 

शहरे गुल में क्यों यूँ रात,
रोकर थी उन्होंने गुजारी,
तौबा हुई 
कोफ़्त बेहद दिल में,
दिन चढ़े खोई जो खुमारी । 


हसरतों को बहलाएँ,
या कि बेजुबान हो जाइये,
इंकारों से डरकर ही सही,
इकरार कुबूल आइये।
    ~ प्रदीप यादव ~


SHAHRE GUL MEIN KYON YUN RAT,
ROKAR THI UNHONE GUJARI ,
TAUBA HUI KOFT BEHAD DIL MEIN,
DIN CHADHE  KHOI JO KHUMAARI .


HASRATON  KO BAHLAAEIN,
YA KI  BEJUBAAN HO JAIYE ,
INKAARO SE DARKAR HI SAHI,
 IQRAAR QUBOOL AAIYE .
  ~ PRADEEP YADAV ~




Monday, 6 May 2013

हत्या

हत्या

हत्या हुई नारी स्वाभिमान की, 
खंड खंड अनबन है मन की  .....
व्यभिचारिता के संकलन की ....
कोख लजाते अभिशप्त जन की ....
कानूनी व्यवस्था के अशक्तपन की ...
निरंकुश नरपिशाचों की उत्श्रंखलपन की।। ~ प्रदीप यादव

updates

हरे ज़ख़्म को हरे पेड़ों की ठंडी,
नम उम्मीदें कम रास आती हैं,
बदलते चेहरों की हकीक़त
घावों के नासूर होने की गवाही हैं...।
 

प्रदीप यादव 
Hare Zakhm ko hare pedon ki thandi,


nam ummidein kam raas aati hain  ....

badalte cheron ki Haqiqat,

ghavon ke,
naasoor hone ki kahaani hai.

~ Pradeep Yadav ~



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आज का स्टेटस कुछ हज़म नहीं हो रहा है,

क्या मेरा दोस्त दुश्वारियों से खफा है ...

दिमाग तोह कह रहा सब ठीक है मगर,

कमबख्त दिल ये गवाही क्यूँ नहीं दे रहा हैं
~ प्रदीप यादव ~


Aaj ka Status kuchh hazam nahi ho rahaa hai,


kya meraa dost dushwariyon se khafaa hain .....


Demaag kehta hain theek hain kambakht 


Yeh dil gwaahi Q nahi de rahaa hain
~ Pradeep Yadav ~

Sunday, 5 May 2013

पके फल सी मुहब्बत


  पके फल सी मुहब्बत  


फलसफा ए मुहब्बत, कुछ ऐसे समझिए।
ये किस्मत का युटर्न है आफत ही कहिए। 

जांबाजी से किनारा कर काफिर हो  रहीए।
भेज दिमाग हड़ताल पे दिल को समझिए।


अजीब दर्द की मिठाई इसे तरसाती ज़रूर।
कहते हैं आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई।

राहतें  फैलाती है मुहब्बत जगा इंसानियत।
दिल्लगी होशवालों में भरती है नेकनियती।  


गिरेगी यूँ पके फल सी मुहब्बत आसमां से।
नसीब नहीं उसके ढुंढ़े जो गलियों चौबारे पे।  प्रदीप यादव  ~

इन दिनों यादों की फेहरिस्त पर, 
चर्चे रहे उन्ही के मुख्तसर,
दिल 
आवारा निकला इस क़दर,
घूमफिर जा बैठा तेरे ही दर।
प्रदीप यादव ~   

Saturday, 4 May 2013

आँखों के इशारे




वोह आँखों के इशारे कह गए,

जो देर तक समझते रहे
इशारों भरी आंख को,
नादां, अभी हसीनों को,
फुर्सत कहाँ, जो समझा करें,
नैनों वाली बात को ....। ~ प्रदीप यादव ~

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नज़रों की गिरफ्त में रखता हैं जो भूली दास्ताँ।

अपनों की दुनिया बसा कर सपने अब आसपास हैं।।  प्रदीप यादव ~

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इजाज़तें दे लाख ये दिल सपनों के टूट जाने की।
इन यादों को आदत होती हैं बस कर रह जाने की।।
 प्रदीप यादव ~

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बातें जो दिलों को छु जातीं हैं।
यादों का मरहम भी लगाती हैं। 
प्रदीप यादव ~  

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खूबसूरत हो चले हैं आज मेरे जानने वाला,
आहिस्ता से कह देते हैं इशारे आँखों वाले। 
प्रदीप यादव ~    

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दिल सुलगाने वाले नशे की क़दर तोह किया कर।
तमाम उम्र बेज़ार रहती हैं दीदार की बेकरारी पर।
 ~ प्रदीप यादव ~    








कायमी


Qaymi abhi uski yaadoon ki,
mere dil ke Idraaz mein rahegi ...
qun karun bayan fasane
Zamane ke samne,
Marz E Gum purane the.
~ Pradeep Yadav ~


कायमी अभी उसकी यादों की,
मेरे दिल के इन्द्राज़ में रहेगी ....
क्यूँ करूं बयाँ फ़साने ज़माने के सामने,
मर्ज़ ए गम पुराने थे ।
~ प्रदीप यादव ~