वोह आँखों के इशारे कह गए,
जो देर तक समझते रहे
इशारों भरी आंख को,
नादां, अभी हसीनों को,
फुर्सत कहाँ, जो समझा करें,
नैनों वाली बात को ....। ~ प्रदीप यादव ~
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नज़रों की गिरफ्त में रखता हैं जो भूली दास्ताँ।
अपनों की दुनिया बसा कर सपने अब आसपास हैं।। ~ प्रदीप यादव ~
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इजाज़तें दे लाख ये दिल सपनों के टूट जाने की।
इन यादों को आदत होती हैं बस कर रह जाने की।। ~ प्रदीप यादव ~
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बातें जो दिलों को छु जातीं हैं।
यादों का मरहम भी लगाती हैं। ~ प्रदीप यादव ~
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खूबसूरत हो चले हैं आज मेरे जानने वाला,
आहिस्ता से कह देते हैं इशारे आँखों वाले। ~ प्रदीप यादव ~
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दिल सुलगाने वाले नशे की क़दर तोह किया कर।
तमाम उम्र बेज़ार रहती हैं दीदार की बेकरारी पर। ~ प्रदीप यादव ~
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