हत्या
हत्या हुई नारी स्वाभिमान की,
खंड खंड अनबन है मन की .....
व्यभिचारिता के संकलन की ....
कोख लजाते अभिशप्त जन की ....
कानूनी व्यवस्था के अशक्तपन की ...
निरंकुश नरपिशाचों की उत्श्रंखलपन की।। ~ प्रदीप यादव ~
हत्या हुई नारी स्वाभिमान की,
खंड खंड अनबन है मन की .....
व्यभिचारिता के संकलन की ....
कोख लजाते अभिशप्त जन की ....
कानूनी व्यवस्था के अशक्तपन की ...
निरंकुश नरपिशाचों की उत्श्रंखलपन की।। ~ प्रदीप यादव ~
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