Friday, 24 May 2013

बातें बतियाने वाली



बातें बतियाने वाली 
राह की हरियाली पैगाम हैं ,
कुदरत रखोगे हरी,तभी
तोह दिल की बनावट भी,
दिखाई देती रहेगी,
करते रहे सिर्फ जो रश्क,
भूलोगे जो कुदरत के सहारे ,
मिट रहेंगे,
जीने के एहसास सारे। प्रदीप यादव ~


पुर्जा ....
पूछना मेरी रूह के हवाले से,
सबब 
मेरी चाहतों के,
वोह खोजते हैं पुर्जा दर पुर्जा,
हालात मेरे इशारों के,
कोई समझाए जाकर उसे,
इस रूह में 'नाम' उसका हैं,
सपना उसी का है, अंदाज़ भी,
अंजाम उसी का है,
सच कहूं तोह मेरे इरादों
पर हर सोच उसी का हैं ....। 
~ प्रदीप यादव ~
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बुलंदिया मेरे मुकाम की,
पा गया जो एक दिन,
मेरे अपनों ने टांग खेंच,
मुझे नीचे गिरा दिया,
मैंने भी कह दिया,
ऎ लोगों कुछ देर ही सही,
मुहॊब्ब्त में नाम अपना,
हमने भी तोह लिख दिया ...। 
प्रदीप यादव ~

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पता पूछते हैं उनका,
जो नजरे मंसूब भी नहीं ....
महबूब कह दिया उसे,
दिल में जिसके ठौर नहीं ... ~ प्रदीप यादव ~

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बदनीयती के इरादे ताड़ ,
मेरे इमां की बोली वो लगा गए .... ।
  ~ प्रदीप यादव ~

पानी हूँ बहता सा रूख मेरे बाँध दो,
बह निकला तो हाथ नहीं आऊँगा .
....~ प्रदीप यादव ~

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इज़ाज़त के मायने हों हरदम नही ,
इल्तिजा जो समझे दिल करीब होते हैं
प्रदीप यादव ~

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जुदाई में इंतज़ार हो, तो दर्द ए सितमगर होता हैं ,
महबूब ना हो पाबन्द,तो ही अस्ल दिलबर होता हैं । ~ प्रदीप यादव


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