Thursday, 22 August 2013

शब्दांजलि


शब्दांजलि 

दिवस विस्तारित किरणों के ,
संकल्पों के सत्याग्रह सा गिरीवर,
अविरल जलधारा अर्ध्य चढाती ,
मैदान खलिहान पोसती जाती ,
बांकपन तराई के उर्वर किसलय का ,
पीत हरिताभ अन्नपूर्णा के वरदान,
शंक्वाकार वृक्ष आकाश चुम्बी,
शल्कों के उम्र भरे इतिहासों ने ,
शब्दांजलि हो पढ़ डाली नई।    
   ~ प्रदीप यादव ~



No comments:

Post a Comment