Sunday, 25 August 2013

  FB           २२ \८  




मेरी देह क्या थी ? बस इक किराएदारी,
बना कर इस सफ़र में बैठा गया सवारी,
सफ़र में हम थे और तुम थे संगी साथी,
रास आती सवारी तभी जाने की तैय्यारी।
  ~ प्रदीप यादव ~ 




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