FB २२ \८
मेरी देह क्या थी ? बस इक किराएदारी,
बना कर इस सफ़र में बैठा गया सवारी,
सफ़र में हम थे और तुम थे संगी साथी,
रास आती सवारी तभी जाने की तैय्यारी। ~ प्रदीप यादव ~
मेरी देह क्या थी ? बस इक किराएदारी,
बना कर इस सफ़र में बैठा गया सवारी,
सफ़र में हम थे और तुम थे संगी साथी,
रास आती सवारी तभी जाने की तैय्यारी। ~ प्रदीप यादव ~
No comments:
Post a Comment