Sunday, 18 August 2013


FB    १० \८


दिल हार दिया जब से तुमसे प्यार किया ,
जीते तू ये जग हार को मेरा नसीब किया। ~ प्रदीप यादव ~


FB     ७\८
मनोनूकूल मित्रगणों में मनोवृत्तियां की टकराहट सर्वदा ,
पाठकों \ मित्रों के मनःपटल को क्लांत करती हैं। भावातिरेक में शब्दों के अर्थ खोते जाते हैंऔर निरं - कुश लेखनी हो अथवा वचन; कठोरता का वाहक सदैव वार्तालाप का शिष्टाचार समेकित रूप में निर्वाहित नहीं करते ।
___प्रदीप यादव

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