Wednesday, 19 September 2012

सुबह का पहिया चलता जाए ....
करते हैं चलो हम भी नई खुराफात,
बहाने दोस्तों को कह लें शुभप्रभात,
दौड़े दौड़े दिन का पहिया,
नई आशायें भरता जाए,
रंगीन सपने वादों का ,
बढ़ते और दृढ होते इरादों का,
उड़ान के हौसलों की पाखों का,
नव पल्लवित शाखों का,
भूरी भूरी अभिलाषाओं का,
मोहक चटख श्रंगारों का,
उल्लास यूँ ही बढाता जाए ।   ..... By प्रदीप यादव, 20 सितम्बर 2012



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