हाहाकार !!!
प्रदीप यादव की स्वरचित रचनाएँ...
Saturday, 22 September 2012
"अधर मैं जनता", भारतीय राजनीती का आधार बन चुकी हैं ।
अब तो संभल जाओ नहीं तो उखाड़ कर फेंक दिए जाओगे सीरिया, तुर्की की तरह ....
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