बेवफाई की परख
परखने में सिर्फ कितने हरज़ाई है हम,
हर्ज़ क्या है बेवफाई के तमगे में सनम ।
न फूलों से आशिकी छूटी
न यादों की मोहताजी हुई कम,
इरादों की मजबूती का तो कायल ज़माना ,
तनहाइयां छुपाने के लिए करते हो जतन ।
......प्रदीप यादव स्वरचित ( 7 सितंबर 2012 )
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