पैमाइश
हकिकतों की पर्दादारी रखा करो
राज़ स्याह अन्धेरों में भी,
अक्सर नुमाया हो जाते है।
हसरतें नामावरान को
गाफिल कर देती है।
हकिकतों की पर्दादारी रखा करो
राज़ स्याह अन्धेरों में भी,
अक्सर नुमाया हो जाते है।
हसरतें नामावरान को
गाफिल कर देती है।
दिल साफ़ की किस्सागोई
ने फसाने तमाम बनाए थे।
ने फसाने तमाम बनाए थे।
सच्चाई की न किया करो पैमाइश
झूठ के हमदर्दों की बस्ती में।
..... प्रदीप यादव ...22/09/2012
झूठ के हमदर्दों की बस्ती में।
..... प्रदीप यादव ...22/09/2012
दीवाने भी भला अपनी मंजिलों के रास्ते कब भुला करते हैं,
रफ्ता रफ्ता दिल की गली बखूबी ताड़ कर तलाश लेते हैं ... by Pradeep Yadav
'धारा 'नहीं पता तो भी धर लिया , अबे ! कार्टूनिस्ट है वो ,
ख़म नहीं ठोकता तो क्या ' धरा ' को समेटने का दम रखता है ... By प्रदीप यादव
खामोश रहूँ या फिर कह दूं ,
दुलार की भाषा समझे वही,
जिसे या तो कुदरत समझ दे,
या फितरत में तासीर हो।
......( प्रदीप यादव स्वरचित )
एहसान मेरी ज़िंदगी पर तूम्हारा है दोस्तों ,
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तो ...हिंदीफिल्म गीत की पंक्तियाँ
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