Saturday, 27 October 2012

bhookh ka Abhaydaan......
Bahane main aaj bhi achhe
banaa liya kartaa haoon,
Jali ko aag aur
bujhee ko Raakh
keh liyaa kartaa hoon .
jalna jalana RaONE hi jaane,

humen to pet ki aag ko hi 
bujhane ke jatan karne the 
kuch log bharpet khilane ki
bat kar mukarte rahe,
hum to langron ki aas mein 
hi yeh JiONE ko dhote rahe ......by Pradeep Yadav

मित्रों पसंद आई हो या दिल को छू  रही हो तो विचार प्रकट जरूर करें । 
रचना की प्रेरणा लाखों खर्च कर जलाए रावणों के चमक दमक और गरीब जनता की खाई का अवसाद है । ...   प्रदीप

बहाने मैं आज भी अच्छे
बना लिया करता हूँ।
लगी को आग और
बुझी को राख
कह लिया करता हूँ।
जलना, जलाना रावण ही जाने,
हमें तो पेट की आग को ही
बुझाने के जतन करने थे ।
 
कुछ लोग भरपेट खिलाने
की 
बात कर बस मुकरते रहे,
हम तो लंगरों की आस में ही,
इस जीवन को सिर्फ ढ़ोते रहे। ..........By ....प्रदीप यादव




  

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