Monday, 8 October 2012

सरकारी कार .....

सरकारी कार .....

सरकार सी कार है,
या कार सी सरकार है।
स्टेरिंग पर बैठा है जो वोह चलाता ही नहीं,
रिमोट कंट्रोल जाने किसके पास हैं ?
कार के टायर नहीं धुरी की बस पुछो नहीं,
कार नहीं डांवाडोल वाहन का प्रकारहै,
कहते हैं जनता का शासन है,शक का कारण नहीं,
पारदर्शिता इतनी की घोटाला भी कोई बचता नहीं,
स्वार्थों का आविष्कार कद नेताओं क्यों घटता नहीं,
खूब अन्धकार है ,बीच धार में कोई रस्ता नहीं,
तन छुपा लो तो भी पेट कभी ढंकता नहीं,
है गंभीर खराबी पर मेकेनिक कोई सुधारता नहीं।
सिर्फ कलर का सोचा  इन्जन मैं लोचा है,
चल रही कैसे कभी किसी ने ये सोचा नही।
महंगा ज़माना पार्टस हैं पुराना,
फिर भी इमानदार यँहा टिकता नहीं।
आज फिर स्टेरिंग पर नए ड्राइवर की दरकार है,
धोखा मत खाना लोगों लालची यह सरकार है,
स्वार्थसिद्दी में लगे इन प्रपंचियों को
उखाड़ फेंकना अब तुम्हारा अधिकार है।
शांति, भाईचारे और समर्थन से संभावना साकार हैं।
जनता के लिए चुन लो मित्रों जनता की ही सरकार है .....
धुरी वाले पहियों से ही संवरता संसार है ,
आशा अभी जीवित है कि अपनी सी कार है।
  ....... प्रदीप यादव स्व-रचित  9 OCT 2012




संध्या सुन्दरी 

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