Tuesday, 13 November 2012

शुभ - लाभ की समृधि

  शुभ - लाभ  की समृधि
"शुभ" कार्य  करें, तो  जीवन में  शुभ फल  प्राप्त होते हैं।
शुभ-कार्य  का  अशुभ  फल हो  यह संभव नहीं, जीवन में
महत्व इस बात पर हो कि विचारों में शुभता हो। वैचारिक
शुभता से ही संस्कारों का उन्नयन होगा, फिर कर्मफल भी
जीवन  में शुभता का  संचरण  करते  हैं। शुभता न  केवल  
भौतिक होती है, वरन  आध्यात्म,  मन  और तन  की  भी 
होनी  आवश्यक  हैं। जीवन  में शुभ  करने  की यथासंभव
कोशिश करनी चाहिए।
जीवन  आनंददायी  एवं  शांतिपूर्ण  है  तो  यह  जीवन  का 
"लाभ"  है। धन की महत्ता से इनकार नहीं है। लेकिन धनी
व्यक्ति परिपूर्ण रूप से  स्वस्थ न हो तब धन से बेहतर हो,
हम  स्वस्थ  रहें, यह  हमारे जीवन  के  बड़े  लाभ   में से
एक है। लाभ  की प्रार्थना  में  संसाधनों का प्रवाह सदा बना
रहे और इच्छित फल जैसे  कला या ज्ञान से धन और यश
प्राप्त हो रहा है  वह  अक्षुण्य रहे। "लाभ"  लिखने से तात्पर्य
है कि परिवार  में धन की निर्बाध प्राप्ति होती रहे।

No comments:

Post a Comment