इंसानी हौसले ...
--By ....प्रदीप यादव-------
जानते हो इन उबड़खाबड़
भूखंडों की संरचना के पीछे से
झांकते समय वोह आदमी जो
रंगीन चश्मों का दायरा छोड़
झांकते समय वोह आदमी जो
रंगीन चश्मों का दायरा छोड़
कर मेरे ओज को बेतकल्लुफी
से सारा दिन तकते मुस्कुराता
हुआ अपना काम निपटाता है।
उसे देख मेरा मन भर आता है,
आजकल थोड़ी तपन समेट ली है
जरा देर, सही इस इंसानी हौसले
से मुतासिर तो हो लिए । .....प्रदीप यादव (स्व- रचित )
से सारा दिन तकते मुस्कुराता
हुआ अपना काम निपटाता है।
उसे देख मेरा मन भर आता है,
आजकल थोड़ी तपन समेट ली है
जरा देर, सही इस इंसानी हौसले
से मुतासिर तो हो लिए । .....प्रदीप यादव (स्व- रचित )
No comments:
Post a Comment