Tuesday, 20 November 2012

फांसी आतंक को

फांसी आतंक को

फांसी तो दी गई ,
परंतु फांस रह गयी बाक़ी,
बैखौफ दुश्मन है पड़ोसी,
घ्रणित इरादों का है दोषी,
रहेगी याद क्या अंडा सेल बिरयानी,
शायद युद्ध आखिरी रहा है बाकी,
भारी पड रही शपथ ये मिलावटी,
न्याय में देरी और सुस्त राजनीति ,
संरक्षित होती रही लोकप्रिय अनीति,
आओ हटाएं नेताओं की सस्ती प्रीति ,
अब और शहीदों की चिताओं को
नहीं मिलेगी असमय आग,
ख़त्म करो आतंक को
कर सुपुर्द ए ख़ाक,
विनाश का अर्थशास्त्र पढ़ने वाले,
तेरे घर पर भी रहते होंगे,
नजरों के तारे, मीठे त्यौहार,
संगीत गूंजता संसार,
फिर काहे की खलिश हैं, बाक़ी,
फांसी तो दी गई,
परन्तु फांस रह गयी बाक़ी .......... प्रदीप स्व-रचित 23 NOV 2012


Badi minnton se sikhi thi adaa salaamati ne,
bahut lahu piya hai in BEJAAN hatiyaaron ne ..... by Pradeep Yadav







No comments:

Post a Comment