Thursday, 24 January 2013

ईद का है मौका ....



ईद का है मौका ....

हों रंगीनियत के दौर, मौला जँहा में ,
 इक कालिख को दिलों से दूर रखना ।
~ प्रदीप यादव ~

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काबिल ऐ इन्साफ 


था नाकाफी वक्त की नाप - जौख रखना ,
देख मेरे सफ़र की रफ़्तार थे सहम गए,
सदीयों सा लम्हा था काटे नही कट रहा 
छोटी सी जिंदगी चार पलों में ढल गयी।
रब बदल कर मुझे अज़ीम अइय्यार बना,
कमज़र्फों के मुकाबिल थोड़ा तैय्यार बना,
ना करना गिनती मेरे कदीम एतबारों की,
मोहलत हो थोड़ी काबिले इंसाफ होने की।


~ प्रदीप यादव~

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