परित्राण .....
नए क़ानून की आवश्यकता पर ...
अदा ठहरी हुक्मरानों की
वो थे हुजुर ए आला,
क्यूँ बनाए नया फिर से,
जब है इम्पोर्टेड वाला ..... प्रदीप यादव
ऊंची इमारतों के बीच गुम धुप .....
धूप का कतरा है कोई मेरे झोपड़े को रोशन कर रहा,
खुदारा सूरज भी महल़ों के शाने से मेहरबान हो रहा । by ..... प्रदीप यादव
कितने दिनों के बाद ठण्ड ने ये रौनक है पाई ,
देख रहा हूँ जहां से मैं सूरज को झुरझुरी सी आई । By ..... प्रदीप यादव
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