राष्ट्र आराधन ....
धर्म हानि नहीं जानूँ मैं अभिमानी,
भस्मभूत करता अनीति की मनमानी,
राष्ट्र हानि फड़काती हैं रुधिर वाहिनी।
देश धर्म का पालन कर मैं,
कहलाऊं सिर्फ एक हिन्दुस्तानी।
उद्धार करो भारतवासी,
श्रम के इस मंदिर का,
गर्व मीनारों से अजां लगाओ,
सुमिरन कर गुरुओं की बानी,
राष्ट्र आराधन की लौ जला,
करो याद उनको भी जरा,
जो शान तिरंगे की रख लड़ मरा।
अमोघ श्रँखला विस्तृत ज्ञान की,
कला,विज्ञान की,अभिमान की,
राष्ट्र कुल ही मेरा कुल अब,
माता भारत भारती।
करो रे उपक्रम समृध देश का,
गाओ फिर यशवर्धन की आरती ।
चलो आओ,मिलकर नाचो, गा लो,
ढोल ताशोंऔर नगाड़ों की थाप से,
अकर्मण्यता के असुर भगा दो। ...... ~ प्रदीप यादव ~
धर्म हानि नहीं जानूँ मैं अभिमानी,
भस्मभूत करता अनीति की मनमानी,
राष्ट्र हानि फड़काती हैं रुधिर वाहिनी।
देश धर्म का पालन कर मैं,
कहलाऊं सिर्फ एक हिन्दुस्तानी।
उद्धार करो भारतवासी,
श्रम के इस मंदिर का,
गर्व मीनारों से अजां लगाओ,
सुमिरन कर गुरुओं की बानी,
राष्ट्र आराधन की लौ जला,
करो याद उनको भी जरा,
जो शान तिरंगे की रख लड़ मरा।
अमोघ श्रँखला विस्तृत ज्ञान की,
कला,विज्ञान की,अभिमान की,
राष्ट्र कुल ही मेरा कुल अब,
माता भारत भारती।
करो रे उपक्रम समृध देश का,
गाओ फिर यशवर्धन की आरती ।
चलो आओ,मिलकर नाचो, गा लो,
ढोल ताशोंऔर नगाड़ों की थाप से,
अकर्मण्यता के असुर भगा दो। ...... ~ प्रदीप यादव ~
अति सुन्दर आराधना..
ReplyDeleteAabhaar aadarniyaa .....
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