Monday, 28 January 2013

चुप रहने वालों की बातें ...



चुप रहने वालों की बातें ....




पसंद करने लगा हूँ, मैं इन चुप रहने वालों की बातें,
मसरूफियत का नाटक कर ताड़ लेतीं हैं, जो आखें ,
जतला गई पहरन की सिलवटें हो रहीं बेसबर रातें ,
हौले से सर हिला कर बजते गानों  पर झूमती बांहें ,
संगदिल कितने हैं ये लब चुप्पी में क़ैद रखलीं बातें ,
कह देता हाल ऐ दिल गर यूँ दिलकश ना होतीं आँखें,
मुक़द्दस सी चाहत रहती हैं जब तकती रहती ये राहें,
पसंद करने लगा हूँ, मैं इन चुप रहने वालों की बातें .......... 

~ प्रदीप यादव ~ 


4 comments:

  1. चुप रहने वालों की बातें अच्छी लगती ही है..

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  2. Khamoshiyon me jo Gungunhat hoti hai woh baat Afsano me kaha hoti hai.....

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  3. Aabhar Deepak ji... aapka Swagat hai ...

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