शहादत की गौरव यात्रा ...... प्रदीप यादव
झूठ ही होगा अगर कहे सिपाही , जंग सिर्फ उन्होंने लड़ी थी,
किसानों ने धरती का सीना चीर , उन्नत उपज उपजाई थी,
हाथों को फिर देकर काम उद्यमी ने कसम उत्थान कि दुहराई थी,
माँओं ने भी पूत न्योछावर कर देश के लिए वीरता दिखलाई थी,
जाँबाज जवानों ने भी ठुकरा कर महलों को परचम लहराई थी,
ममता ने खून जिगर का बहनों ने लाली सिन्दुरी छलकाई थी,
ये हिन्द न फिर हिन्द होता गर कोख रण वीरो को जन्म न दे पाती,
ये हिन्द न फिर हिन्द होता गर माँ, धरती को माँ कहना न सिखलाती...
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