A prose by my friend Suhas Dubey Ji : Jindgee ko Jindgee ka Tohfa hai Pita....
पिता का रूप जन्म देती है माँ चलना सिखाते हैं पिता
हर कदम पे बच्चों के रहनुमा होते हैं पिता
फूलों से लहराते ये मासूम बच्चे प्यारी सी इस बगिया के बागबान होते हैं पिता
कष्ट पे हमारे दुखी होते है बहुत अश्क आंखों से बहे न बहे पर दिल में रोते हैं पिता
धुप गम की हम तक न पहुँचे कभी साया बन सामने खड़े होते हैं पिता
पूरी करने को सारी इच्छाएँ हमारी काम के बाद भी काम करते हैं पिता
गलतियों पे हमारी डाँटते हैं हमें डाँट के ख़ुद भी दुखी होते हैं पिता
रो के जब सो जाते हैं हम पास बैठ देर तक निहारते हैं पिता
जीवन में आती हैं जब दो राहें कभी सही राह का इशारा कर देते हैं पिता
लड़खड़ाये जो कभी कदम हमारे आपनी बांहों मे थाम लेते हैं पिता
देने को अच्छा मुस्तक्बिल हमें पूँजी जीवन भर की हम पे लुटा देते हैं पिता
खुश रहें बेटियाँ दुनिया में अपनी कर्ज ले के भी बेटी का घर बसाते हैं पिता
निभाने को रीत इस दुनिया की भरे दिल से बेटी को विदा कर देते हैं पिता
उन्हें छोड़ जब दूर बस जाते हैं हम चीजें देख हमारी बहुत रोते हैं पिता ,
पिता का रूप जन्म देती है माँ चलना सिखाते हैं पिता
हर कदम पे बच्चों के रहनुमा होते हैं पिता
फूलों से लहराते ये मासूम बच्चे प्यारी सी इस बगिया के बागबान होते हैं पिता
कष्ट पे हमारे दुखी होते है बहुत अश्क आंखों से बहे न बहे पर दिल में रोते हैं पिता
धुप गम की हम तक न पहुँचे कभी साया बन सामने खड़े होते हैं पिता
पूरी करने को सारी इच्छाएँ हमारी काम के बाद भी काम करते हैं पिता
गलतियों पे हमारी डाँटते हैं हमें डाँट के ख़ुद भी दुखी होते हैं पिता
रो के जब सो जाते हैं हम पास बैठ देर तक निहारते हैं पिता
जीवन में आती हैं जब दो राहें कभी सही राह का इशारा कर देते हैं पिता
लड़खड़ाये जो कभी कदम हमारे आपनी बांहों मे थाम लेते हैं पिता
देने को अच्छा मुस्तक्बिल हमें पूँजी जीवन भर की हम पे लुटा देते हैं पिता
खुश रहें बेटियाँ दुनिया में अपनी कर्ज ले के भी बेटी का घर बसाते हैं पिता
निभाने को रीत इस दुनिया की भरे दिल से बेटी को विदा कर देते हैं पिता
उन्हें छोड़ जब दूर बस जाते हैं हम चीजें देख हमारी बहुत रोते हैं पिता ,
Lovely
ReplyDelete🙏 आभार आपका 🙏
DeleteShandar
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