ये आंसू ही तोह थे जो कहते रहे ,
तू अभी तलक मुझमें रही बाकी ,
वर्ना भूलाने को यादों की चुभन ,
पैमाने की जीनत बनी थी साकी । ~ प्रदीप यादव ~
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बावस्ता गम से हमने घूँट कड़वे कुछ ज़हर के पीए ,
होशवालों ने कसम से मशविरे काबिल तमाम दिए । ~ प्रदीप यादव ~
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हमने तो ढूंढ रखे थे काँधे कईजनाजे में सहारों के लिए ,
बस नसीब जाने कंहा से उम्र तलाश लाये जीने के लिए । ~ प्रदीप यादव ~
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किसी संगतराश की मूरत से थे वो ,
अदा पर उनकी ये दिल था हारा ।
चंद क़दमों के हमसफ़र थे वो ,
किसी भटके को मिला जो सहारा । ~ प्रदीप यादव ~
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इस कदर उलझाए रखना,मेरे मामले को
बेनिफिट ऑफ डाऊट की भी जगह ना हो। ~ प्रदीप यादव ~
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तू अभी तलक मुझमें रही बाकी ,
वर्ना भूलाने को यादों की चुभन ,
पैमाने की जीनत बनी थी साकी । ~ प्रदीप यादव ~
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बावस्ता गम से हमने घूँट कड़वे कुछ ज़हर के पीए ,
होशवालों ने कसम से मशविरे काबिल तमाम दिए । ~ प्रदीप यादव ~
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हमने तो ढूंढ रखे थे काँधे कईजनाजे में सहारों के लिए ,
बस नसीब जाने कंहा से उम्र तलाश लाये जीने के लिए । ~ प्रदीप यादव ~
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किसी संगतराश की मूरत से थे वो ,
अदा पर उनकी ये दिल था हारा ।
चंद क़दमों के हमसफ़र थे वो ,
किसी भटके को मिला जो सहारा । ~ प्रदीप यादव ~
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इस कदर उलझाए रखना,मेरे मामले को
बेनिफिट ऑफ डाऊट की भी जगह ना हो। ~ प्रदीप यादव ~
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talasha tha zindgee ko jisne bas tum ho vo ladkiyon,
ReplyDeleteashay abla nirbal komal ya "durga" khud ko banalo ladkiyon..........By Pradeep