बारिश का ड्रामा
बूँद बूँद गिर रही थी बारिश , चमक रही बिजली , महक सौंधी छा गई ।
पत्ता - पत्ता हुआ सब्ज़ फिर सुर्ख हुए फूलों पर गुम तितली भी आ गई ।
दाना चुगती चिडीया का घोंसला भी चूजों की चहचहाट से गूँज गया ।
पपीहा की पिहू , कुहुक कोयल पर नृत्य मयूर भरमाकर झूम गया।
चाकलेट फंसे दांतों से लार टपकाते बच्चे अपनी टोलियाँ मैं ,
फिर सिमट आते छातों मैं ।
तो कुछ धमाल मचाते जा फिसलते कीचड़ भरी डबरीयों मैं ,
लोटते थे कई नर्म घांसों मैं ।
देखो बाबू यह पहली बारिश का ड्रामा, हर पात्र अपना बेस्ट दे रहा है।
जाने कौन कहता कट , लाइट साउंड और ऐक्शन कोइ कह गया है ।
इन्द्रधनुषी रंगों से रंगा आसमान से धरती पर पर्दा सा हरपल डोल रहा है ।
गड़गड़ाते बादलों की कोर से झिलमिलाती किरणों की राह खोल रहा है ।
बारिश का ड्रामा By ~ प्रदीप यादव ~
बूँद बूँद गिर रही थी बारिश , चमक रही बिजली , महक सौंधी छा गई ।
पत्ता - पत्ता हुआ सब्ज़ फिर सुर्ख हुए फूलों पर गुम तितली भी आ गई ।
दाना चुगती चिडीया का घोंसला भी चूजों की चहचहाट से गूँज गया ।
पपीहा की पिहू , कुहुक कोयल पर नृत्य मयूर भरमाकर झूम गया।
चाकलेट फंसे दांतों से लार टपकाते बच्चे अपनी टोलियाँ मैं ,
फिर सिमट आते छातों मैं ।
तो कुछ धमाल मचाते जा फिसलते कीचड़ भरी डबरीयों मैं ,
लोटते थे कई नर्म घांसों मैं ।
देखो बाबू यह पहली बारिश का ड्रामा, हर पात्र अपना बेस्ट दे रहा है।
जाने कौन कहता कट , लाइट साउंड और ऐक्शन कोइ कह गया है ।
इन्द्रधनुषी रंगों से रंगा आसमान से धरती पर पर्दा सा हरपल डोल रहा है ।
गड़गड़ाते बादलों की कोर से झिलमिलाती किरणों की राह खोल रहा है ।
बारिश का ड्रामा By ~ प्रदीप यादव ~

Tabhi To bood ko nadiya ki ,
ReplyDeletenadiya ko samandar ki ,
aur samandar jab ghumdte badal ki
chadar tan leta hain to apni namkin salhiyat ke bavjood ,
do" Boond " meete panee ko tarasta hai
Jeevan Chakr ka privrtan hi to K H A LI S H ka aadhar banta hai nidan bhi vahi hota hai...
खलिश के माने
ReplyDeleteबूंदों को नदीया की ,
नदीया को समंदर की
और समंदर भी जब घुमडते बादलों की
चादर तान लेता है तो अपनी नमकीन सलाहियत के बावजूद ,
दो ' बूँद ' मीठे पानी को तरसता है ।
जीवन चक्र का परिवर्तन ही तो K H A L I S H का आधार बनता है
निदान भी वही होता है । किसी कमी के होने का एहसास है खलिश .....