अजाब
मुफलिसी में जाने कैसे काम चलता रहा
मैं पसंद उनको आता रहा,बस काम चलता रहा ,
रात बैचैन रही लेकिन झौंके आते रहे और काम चलता रहा ...
रईसी हुई थी तारी पैसे चंद मिल गए और काम चलता रहा...
उलझनों से इश्क़ बेसाख्ता हुआ, जो ना सुलझा पाया तो होश फाख्ता हुआ
काम आती रही किसी खास की दुआ, होश खोकर भी अंजाम मुकद्दस हुआ
अजाब बन गयी थी, उडती पतंग सी ये ज़िन्दगी,
दी, ढील तो डोर की देख उलझनों को दंग रह गयी । ..... प्रदीप यादव
मुफलिसी में जाने कैसे काम चलता रहा
मैं पसंद उनको आता रहा,बस काम चलता रहा ,
रात बैचैन रही लेकिन झौंके आते रहे और काम चलता रहा ...
रईसी हुई थी तारी पैसे चंद मिल गए और काम चलता रहा...
उलझनों से इश्क़ बेसाख्ता हुआ, जो ना सुलझा पाया तो होश फाख्ता हुआ
काम आती रही किसी खास की दुआ, होश खोकर भी अंजाम मुकद्दस हुआ
अजाब बन गयी थी, उडती पतंग सी ये ज़िन्दगी,
दी, ढील तो डोर की देख उलझनों को दंग रह गयी । ..... प्रदीप यादव
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