Monday, 17 December 2012

भारत पुत्र रासो


भारत पुत्र रासो

दैदीप्यमान हैं,
परम्परा विश्व के वितान पर,

लक्ष्य सिद्धि फल अनुष्ठान
हो रहे यज्ञ वेदी पर ,

सर्वलौकिक हो दृष्टि
मानवीयता के सर्वनाम पर,

निमित्त तुम बन जाओ
उपादानों का संज्ञान कर,

बलवीर हो प्रणों
शारीरिक सौष्ठव को संपन्न कर,

विवेक का प्रमाण दर्शाओ
काल का कीर्तिमान कर,

कृपण, निष्ठुर, अमानुषक पंथ को,
 निराधार निर्बल कर,

जीवेत हे भारतेय,
युग युगों पर्यंत पथ प्रशस्त कर । 


         By .... प्रदीप यादव  ( स्व-रचित )

1 comment:

  1. कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें..

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