भावनाएं जो कह गया (...@ पार्ट 2 )
कीमती याद ....
हम क्या जाने कितनी,
कीमत तय की है यादों की,
इस दिल ऐ नादान ने,
उस राहे गुज़र पर ...
लेकिन ये तोह
ज़रूर पता चला,
कितना बेशकीमत है,
वोह इन यादों में बसने वाला ...।
~प्रदीप यादव ~
समझ के दायरे
लोग समझते रहे कि चिराग हुए हैं रोशन महफ़िल करने,
तू ही समझा या मैं जाना दास्ताँ दिल ये अंगार करने की।
~ प्रदीप यादव~
तिलस्मी पूल
ढल रही थी यूँ शाम फिर समन्दर किनारे ...
तिलस्मी पूल से जुडते गए यादों के सहारे |
~ प्रदीप यादव~
हवाला
लेकर इश्क का इक हवाला उसे,दर्द ने पाला था,
फक्त मुरीद हैं तेरा, किया फासलों ने बर्बाद जिसे।
~ प्रदीप यादव ~
उम्दा ...
ReplyDeleteSwaagat hai aapkaa, Aadarniya Amritaa ji .....
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