Thursday, 24 January 2013

भावनाएं जो कह गया (...@ पार्ट 2 )

 
भावनाएं जो कह गया (...@ पार्ट 2 )



कीमती याद ....
हम क्या जाने कितनी,
कीमत तय की है यादों की,
इस दिल ऐ नादान ने,
उस राहे गुज़र पर ...
लेकिन ये तोह
ज़रूर पता चला,
कितना बेशकीमत है,
वोह इन यादों में बसने वाला ...।


~प्रदीप यादव ~


समझ के 
दायरे
लोग समझते रहे कि चिराग हुए हैं रोशन महफ़िल करने,
तू ही समझा या मैं जाना दास्ताँ दिल ये अंगार करने की। 
~ प्रदीप यादव~ 

तिलस्मी पूल

ढल रही थी यूँ शाम फिर समन्दर किनारे ...

तिलस्मी पूल से जुडते गए यादों के सहारे |

~ प्रदीप यादव~


हवाला

लेकर इश्क का इक हवाला उसे,दर्द ने पाला था,
फक्त मुरीद हैं तेरा, किया फासलों ने बर्बाद जिसे।
~ प्रदीप यादव ~

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