हाहाकार !!!
प्रदीप यादव की स्वरचित रचनाएँ...
Wednesday, 24 April 2013
शुबहा
शुबहा
ए शीशे सा दिल रखने वाले,
दुआ है पत्थर ये मोम हो जाए।
तुझे टूटने का दर्द न हो
अलामते शुबहा भी न बढ़ने पाए।
~
प्रदीप यादव
~
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