Saturday, 13 April 2013

Khoj ki tahreeq



गद्दार वफ़ा ,
दुनियादारी की हुई अदा ।  ~  प्रदीप यादव ~


मगरुरियत बंधी फ़रियाद हूँ
      दर्द की सच्चाई से भीगता हिसाब हूँ ,
हाँ मैं फ़क्त एक और बेवफा हूँ,
       धुंधले जख्मों की हरी याद हूँ । 

   
  ~  
प्रदीप यादव ~


"magrooriyat se Bandhi fariyad hoon,

 dard ki sachhai se bhigata Hisab hoon,


 haan main Faqt Ek aur bewafa hoon,


 dhundhle Zakhamon ki hari yaad hoon."


  ~ Pradeep Yadav ~



यूँ काँच से कटने सा 
दर्द नकी आँखों में देखा हैं ...
दर्दी कीमत बढ़ा गया जबसे दरकिनार किया हैं। ~  प्रदीप यादव ~


ए सितारों के आशियानों में रहने वाले,
ज़मीं पे भी कभी ठिकाना तोह बना ,
हस्तियों की किस्मत तराशने वाले,
तिनकों के सहारे ढूँढते से नज़रें मिला।
 
~  प्रदीप यादव ~


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