गद्दार वफ़ा ,
दुनियादारी की हुई अदा । ~ प्रदीप यादव ~
मगरुरियत बंधी फ़रियाद हूँ
दर्द की सच्चाई से भीगता हिसाब हूँ ,
हाँ मैं फ़क्त एक और बेवफा हूँ,
धुंधले जख्मों की हरी याद हूँ ।
~ प्रदीप यादव ~
"magrooriyat se Bandhi fariyad hoon,
dard ki sachhai se bhigata Hisab hoon,
haan main Faqt Ek aur bewafa hoon,
dhundhle Zakhamon ki hari yaad hoon."
~ Pradeep Yadav ~
यूँ काँच से कटने सा दर्द उनकी आँखों में देखा हैं ...
दर्दी कीमत बढ़ा गया जबसे दरकिनार किया हैं। ~ प्रदीप यादव ~
ए सितारों के आशियानों में रहने वाले,
ज़मीं पे भी कभी ठिकाना तोह बना ,
हस्तियों की किस्मत तराशने वाले,
तिनकों के सहारे ढूँढते से नज़रें मिला। ~ प्रदीप यादव ~
दर्द की सच्चाई से भीगता हिसाब हूँ ,
हाँ मैं फ़क्त एक और बेवफा हूँ,
धुंधले जख्मों की हरी याद हूँ ।
~ प्रदीप यादव ~
"magrooriyat se Bandhi fariyad hoon,
dard ki sachhai se bhigata Hisab hoon,
haan main Faqt Ek aur bewafa hoon,
dhundhle Zakhamon ki hari yaad hoon."
~ Pradeep Yadav ~
यूँ काँच से कटने सा दर्द उनकी आँखों में देखा हैं ...
दर्दी कीमत बढ़ा गया जबसे दरकिनार किया हैं। ~ प्रदीप यादव ~
ए सितारों के आशियानों में रहने वाले,
ज़मीं पे भी कभी ठिकाना तोह बना ,
हस्तियों की किस्मत तराशने वाले,
तिनकों के सहारे ढूँढते से नज़रें मिला। ~ प्रदीप यादव ~
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