शुभ दिवस आ. मित्रों
कुछ बातें दनिया में वज़नदार होती तो ज़रूर हैं,
लेकिन क्या कम नहीं कि भारीपन दूर करती हैं। ~ प्रदीप यादव ~
प्रेम का मन्त्र
जब तक संतोष का मंत्र हम नहीं
सीखते कोई और मन्त्र प्रभावी
ही नहीं होता,
ज्ञान का मन्त्र विवेक होता हैं,
आस्था का मन्त्र निष्ठां होती है,
भोग लिप्सा का प्रतिफल है,
स्नेह का आविर्भाव उदारता है,
प्रेम का रंग देने के भाव में ही है।
निष्काम याचना प्रेम शक्ति देती है।
किन्तु प्रेम और भक्ति ईश्वरीय
प्रसाद है आनादर करने वाले या
असहिष्णु अहंकारी इसकी सिर्फ
कल्पना भर कर सकते है।
यह प्रलोभनों से प्रभावित नही होता,
आत्मनुरागी हो अहंकारी भी नहीं होता,
विषयों के अधीन मलिन भी नहीं होता,
एक सतत सुधारवाद की परीक्षा हैं प्रेम।
~ प्रदीप यादव ~
वोह नील फूल को रख लेना सहेज़ कर ,
आकाश के आँगन पर जब सूरज होता,
तो यही नीला फूल किरणों को बिखेरता,
मेरे वितान में भी यह प्रदीप सा शोभित,
सूरज सी अगन रखता हैं तप्त हो क्रमित,
कर्म का क्रम, उपाय का क्रम धोकर पीत,
आभ में नतमस्तक होगी सुरुचि की प्रीत,
भोर होते ही तारों संग चंद्र होता निरापद,
स्वयं तो फूल की गंध से परे हटो नीलाभ,
तेज ये बंजरपन लिए है अन्यमयस्क फूल,
तू है प्रतिभा रंग नमी गंध का अदभुद मेल। ~ प्रदीप यादव ~
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