Sunday, 1 September 2013

हमराज

 FB         २ \९ 

मेरे Mystery Mitर , जब से तुम्हें नामों की जुगाड़ से बाहर ,
रह कर अनोखा करते देखा है। ……

मेरे Mystery Mitर , जब से तुम्हें अंधी दौड़ को पीछे छोड़ ,
बेडौल दुनिया में संतुलित होते देखा है । ….

मेरे Mystery Mitर , जब से तुम्हें नाचते गाते जिंदगी का
हर लम्हें पर इंतज़ार करते देखा है । …….

मेरे Mystery Mitर , बांकपन से संजीदगी और चुनौती से ,
आँखें मिलाने का दुस्साहस देखा है । …

दोस्त हर राज़ को राज़ रखने की कीमत ना चुकाना ,
हर्ज़ ज़िन्दगी के हमराज भूलाने में नहीं ख़ुशी भुल जाने में है ।

                   
          ~ प्रदीप यादव

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