FB ३/९
बापू बनना …
पथ डिग जाऊं जिस दिन
वचन तोड़ना अहिंसा वाला ,
मार मुझे टाँगना चौराहे पर,
पथ गुज़रे संदिग्ध हवाला।
खींच निकालना शव मेरा ,
उसे दिखा कर न्यायदण्ड ,
नई खड्ग से यमद्वार दिखाना ,
खाल छीलकर मेरी जुते बना,
खूब दलना खरपतवारों को,
है ये नातेदार नाज़ायज ।
शहीद प्राणों की आहुति देते ,
सर काटने वाला ,
दुश्मन के मन हैं काला,
मेरा चोला निर्लिप्त रहे ,
मुखर रहे बोलों की ज्वाला ,
माँ ,अब ना पीउँगा ये हाला,
तंत्र ( सिस्टम ) के भक्षक को
भेंट करूँ कालपात्र लहू वाला,
जलता लोकतंत्र स्याह काला ,
मस्त मदांध मतवाला,
तू काहे की जनता है री,
मैं काहे का रखवाला। BY ... ~ प्रदीप यादव ~
It sayas ….
" It was My Determination , …. so they thought me the deserving one ! "
बापू बनना …
पथ डिग जाऊं जिस दिन
वचन तोड़ना अहिंसा वाला ,
मार मुझे टाँगना चौराहे पर,
पथ गुज़रे संदिग्ध हवाला।
खींच निकालना शव मेरा ,
उसे दिखा कर न्यायदण्ड ,
नई खड्ग से यमद्वार दिखाना ,
खाल छीलकर मेरी जुते बना,
खूब दलना खरपतवारों को,
है ये नातेदार नाज़ायज ।
शहीद प्राणों की आहुति देते ,
सर काटने वाला ,
दुश्मन के मन हैं काला,
मेरा चोला निर्लिप्त रहे ,
मुखर रहे बोलों की ज्वाला ,
माँ ,अब ना पीउँगा ये हाला,
तंत्र ( सिस्टम ) के भक्षक को
भेंट करूँ कालपात्र लहू वाला,
जलता लोकतंत्र स्याह काला ,
मस्त मदांध मतवाला,
तू काहे की जनता है री,
मैं काहे का रखवाला। BY ... ~ प्रदीप यादव ~
It sayas ….
" It was My Determination , …. so they thought me the deserving one ! "
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