Sunday, 1 September 2013

 FB       ३/९

बापू  बनना … 

पथ डिग जाऊं जिस दिन
वचन  तोड़ना अहिंसा वाला ,
मार मुझे टाँगना चौराहे पर,
पथ गुज़रे संदिग्ध हवाला।
खींच निकालना शव मेरा ,
उसे दिखा कर न्यायदण्ड ,
नई खड्ग से यमद्वार दिखाना ,
खाल छीलकर मेरी जुते बना,
खूब दलना खरपतवारों को,
है ये नातेदार नाज़ायज ।

शहीद प्राणों की आहुति देते ,
सर काटने वाला ,
दुश्मन के मन हैं काला,

मेरा चोला निर्लिप्त रहे ,
मुखर रहे बोलों की ज्वाला ,
माँ ,अब ना पीउँगा ये हाला,
तंत्र ( सिस्टम ) के भक्षक को
भेंट करूँ कालपात्र  लहू वाला,
जलता लोकतंत्र स्याह काला ,
मस्त मदांध मतवाला,
तू काहे की जनता है री,
मैं काहे का रखवाला।  BY ... ~ प्रदीप यादव ~

It sayas …. 
" It was My Determination , ….  so they thought me the deserving one ! "

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